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शुक्रवार, 9 नवंबर 2012

कार्यकर्ता प्रशिक्षण वर्ग एवं सर्वभाषा साहित्यकार सम्मान समारोह 

अखिल भारतीय साहित्य परिषद् का दो दिवसीय कार्यकर्ता प्रशिक्षण वर्ग, सर्वभाषा साहित्यकार सम्मान एवं संस्कृति वत्सल अलंकरण समारोह 18-19 अक्टूबर 2012 को मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में सम्पन्न हुआ। प्रशिक्षण वर्ग में 16 प्रदेशों के 212 कार्यकर्ता उपस्थित रहे ।
प्रशिक्षण वर्ग का उदघाटन परिषद् के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ-बलवंत जानी ने किया। उदघाटन सत्र में डॉ-जानी के अतिरिक्त राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्री श्रीधर पराड़कर ने कार्यकर्ताओं को संबोधित किया।

परिषद् के महामंत्री श्री रामनारायण त्रिपाठी के देहावसान के पश्चात महामंत्री की नियुक्ति अनिवार्य हो गई थी। अत: प्रमुख कार्यकर्ताओं से चर्चा कर राष्ट्रीय मंत्री के रूप में कार्य कर रहे श्री ऋषिकुमार मिश्र मुंबई को परिषद् का महामंत्री निश्चित किया गया। इसकी घोषणा करते हुए कार्यकारी अध्यक्ष डॉ- यतीन्द्र तिवारी ने श्री ऋषिकुमार मिश्र का परिचय कर्यकर्ताओं  को कराया। 


इस अवसर पर परिषद् की त्रेमासिक पत्रिका "साहित्य परिक्रमा" के नवीन अंक का विमोचन भी किया गया।   कार्यकारी अध्यक्ष डॉ-यतीन्द्र तिवारी ने पत्रिका के संपादक दायित्व से मुक्त हो रहे श्री मुरारीलाल गुप्त गीतेश की विदाई तथा बड़ोदा निवासी श्रीमती क्रांति कनाटे  की संपादक के रूप में नियुक्ति की घोषणा की। उन्होंने शाल, श्रीफल  एवं पुष्पगुच्छ से निवर्तमान एवं वर्तमान संपादक का सत्कार किया।
प्रशिक्षण के अंतर्गत चर्चा के विषय थे - परिषद् परिचय; कार्य, कार्यकर्ता और कार्यक्रम; हमारा साहित्यिक   दृष्टिकोण। दो  सत्र कार्यकर्ताओं की अभिव्यक्ति के थे। उनमे कार्य वृद्धि के लिए स्थानीय स्तर पर किये गए प्रयासों को कार्यकर्ताओं ने बताया तथा दुसरे सत्र में उन्होंने अपने प्रश्न, समस्या तथा सुझावों को अधिकारीयों के समक्ष रखा।
19 अक्टूबर को विधाश: कथा, कविता एवं ललित लेखन पर प्रशिक्षण हुआ। कार्यकर्ता अपनी रूचि की विधा में सम्मिलित हुए। कथा सत्र के प्रशिक्षक थे श्री जगदीश तोमर, निदेशक प्रेमचंद सृजन पीठ उज्जैन, कविता सत्र के प्रशिक्षक थे डॉ-रविन्द्र शुक्ल झाँसी और ललित लेखन सत्र के प्रशिक्षक थे डॉ-देवेन्द्र दीपक पूर्व निदेशक साहित्य अकादमी भोपाल।

11-00 बजे सर्व भाषा साहित्यकार सम्मान समारोह हुआ। 14 भारतीय भाषाओँ के साहित्यकारों का सम्मान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूजनीय सरसंघचालक डॉ-मोहनराव भागवत के करकमलों से हुआ। समारोह के अध्यक्ष थे माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविध्यालय भोपाल  के कुलपति डॉ-बृजकिशोर कुठियाला। सम्मानित साहित्यकार थे - डॉ-नरेन्द्र कोहली (हिंदी), डॉ-नागेन्द्रनाथ प्रधान (ओरिया), डॉ-यतीन्द्र गोस्वामी (असमी), श्री ज्ञानप्रकाश टेकचन्दानी (सिन्धी), डॉ-श्रीमती एस-शेशारत्नाम (तेलगु), श्री रमेश पतंगे (मराठी), श्री एस-रामेशन नायर (मलयालम), डॉ-टी-वी-कतत्मनी  (कन्नड़), डॉ-मिथिलाप्रसाद त्रिपाठी (संस्कृत), डॉ-मोहनलाल सर (कश्मीरी), डॉ-एम्-गोविंदराजन (तमिल), श्री जयगोपाल कोचर (पंजाबी),  डॉ-सुदीप बासु (बंगाली), श्रीमती वंदना शांतइंदु (गुजराती). श्री रामेशन नयन तथा श्री यतीन्द्र गोस्वामी शारीरिक अस्वस्थता के कारण  उपस्थित नहीं हो सके। उन्होंने अपनी असमर्थता पत्र द्वारा सूचित कर दी थी।

19 अक्टूबर की सायंकाल 6-00 बजे भोपाल के रविन्द्र सभा भवन में भाषा तथा साहित्य के विकास के लिए किये गए कार्यों के निमित्त मध्यप्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान को "संस्कृति वत्सल" अलंकरण से विभूषित किया गया।   संघ के सरसंघचालक पूजनीय मोहनराव भागवत ने श्री शिवराज सिंह चौहान को अलंकृत किया। समारोह की अध्यक्षता अटलबिहारी  हिंदी विश्वविध्यालय भोपाल के कुलपति डॉ-मोहनलाल छीपा ने की। विशिष्ट अतिथि थे मध्यप्रदेश के संस्कृति मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा .

सोमवार, 17 सितंबर 2012


श्री सुदर्शन जी को  श्रद्धांजलि
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के निवर्तमान सरसंघचालक  श्री सुदर्शन जी भारतीय मनीषा के मूर्तिमान रूप थे। प्रत्येक विषय के अधिकारी प्रवक्ता थे। कर्णाटक के मूल निवासी होने पर भी हिंदी सहित कई भाषाओँ के ज्ञाता थे। उनका भाषा ज्ञान केवल पढने लिखने तक सीमित नहीं था। उस भाषा में अस्खलित भाषण भी देते थे।  भाषा की शुद्धता का उनका विशेष आग्रह रहता था। किसी भी पुस्तक अथवा समाचार पत्र को पढ़ते समाया अशुद्धियों को रेखांकित करते जाते थे। मिलने पर सम्बंधित व्यक्ति को बताते थे। समाचार पत्रों में की जा रही अशुद्धियों को लेकर कई संपादकों से व्यक्तिगत भेट कर उनसे आग्रह करते थे की विशेष ध्यान देकर त्रुटियों को दूर करें।
उन्होंने स्वयं कई पुस्तकों का लेखन भी किया।
उनके विशेष आग्रह पर ही मध्य प्रदेश सरकार ने हिंदी विश्व विद्यालय की स्थापना की।
अध्ययन पूर्ण करने के बाद अपना सम्पूर्ण जीवन राष्ट्र को समर्पित कर दिया था। और अंतिम समय तक राष्ट्र सेवा में समर्पित रहे।
उनके जीवन की सरलता, सहजता, शुचिता, कर्मठता सबको प्रेरणा देने वाली है। जीवन भर कार्यकर्ताओं को प्रेरणा दी, मृत्यु के बाद भी अपनी आँखे दान कर  दो लोगों को दृष्टि दे गए। कर्म समर्पित सार्थक जीवन जीने वाला व्यक्तित्व आज हमारे बीच से चला गया। लेकिन  उनकी स्मृति सदैव बनी रहेगी।
अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के कई आयोजनों में वे उपस्थित रहे थे। परिषद् के हम सभी कार्यकर्ता उनकी जीवटता को सादर प्रणाम करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित करते है। 

शुक्रवार, 3 फ़रवरी 2012


अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के राष्ट्रीय महामंत्री श्री रामनारायण त्रिपाठी 'पर्यटक' का असाध्य कर्क रोग के कारण २९ जनवरी २०१२ को लखनऊ में देहावसान हो गया। श्री त्रिपाठी मासिक पत्रिका राष्ट्रधर्म के सह-संपादक, पत्रिका पुष्पवाटिका के परामर्शदाता तथा नवोदित साहित्यकरपरिषद् के संस्थापक थे.
श्री त्रिपाठी को २००७ में अखिल भारतीय साहित्य परिषद् का राष्ट्रीय महामंत्री चुना गया था. २०११ में पुन: महामंत्री निर्वाचित हुए थे। श्री रामनारायण त्रिपाठी जी का निधन साहित्य परिषद् की अपूर्णीय क्षति है। परिषद् उन्हें अश्रुपूरित श्रधांजलि अर्पित करती है।

बुधवार, 11 जनवरी 2012




७-८ जनवरी २०१२ को महाराष्ट्र प्रान्त के नासिक शहर में अखिल भारतीय साहित्य परिषद् की राष्ट्रीय संगोष्ठी 'भावरूप राम' विषय पर सम्पन्न हुई। संगोष्ठी का उदघाटन कैलाश मठाधिपति तथा महामंडलेश्वर स्वामी संवितानंद सरस्वती महाराज एवं प्रख्यात उपन्यासकार डॉ. नरेन्द्र कोहली ने किया। दो दिनों में ६ चर्चा सत्रों में १० प्रान्तों से पधारें ४८ विद्वानों ने संगोष्ठी में सहभागिता करते हुए अपने विचार प्रस्तुत किये। संगोष्ठी का समापन परिषद् के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ.यतीन्द्र तिवारी के उदबोधन से हुआ।
म-प्र- साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ- त्रिभुवननाथ शुक्ल, पूर्व निदेशक डॉ.देवेन्द्र दीपक, निराला सृजन पीठ के निदेशक श्री दिवाकर वर्मा, आंध्र से डॉ.शेशारत्नम, उड़ीसा से डॉ.विजय महंती, उत्तर प्रदेश से डॉ.रामस्वरूप खरे, डॉ.रविन्द्र शुक्ल, गुजरात से डॉ.रानू मुखर्जी तथा श्रीमती क्रांति, बिहार से डॉ.रविन्द्र शहाबादी, राजस्थान से राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ.कृष्णचंद्र गोस्वामी तथा डॉ.मठुरेश्नंदन कुलश्रेष्ठ की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
इस अवसर पर साहित्य परिक्रमा का विशेषांक भी प्रकाशित किया गया। इस विशेषांक में १२ भाषाओँ तथा १० बोलियों के ८४ विद्वानों के आलेख समाहित हैं.

गुरुवार, 3 फ़रवरी 2011

त्रैवार्षिक त्रयोदश राष्ट्रीय अधिवेशन

दीपप्रज्वलन कर उदघाटन करते .प्र. के संस्कृति-मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा, श्री एन.सुन्दरम
तथा प्रो.रामेश्वर मिश्र पंकज

श्री लक्ष्मीकांत शर्मा,
श्री एन.सुन्दरम
प्रो.रामेश्वर मिश्र पंकज
अखिल भारतीय साहित्य परिषद् का त्रयोदश अधिवेशन गुजरात के भुज नगर में - फरवरी २०११ को संपन्न हुआ अधिवेशन का स्थल शिव बालाकश्राम नगर के शोरगुल से दूर विस्तीर्ण क्षेत्र में फैला हुआथाअधिवेशन का विधिवत उदघाटन मध्य प्रदेश के संस्कृति मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा तथा तमिल के उद्भट विद्वान् श्री एन.सुन्दरम के द्वारा किया गया महामंत्री श्री रामनारायण त्रिपाठी ने परिषद् के गत तीन वर्षों का लेखाजोखा तथा कार्य की प्रगति का इतिवृत्त प्रस्तुत कियावहीँ अधिवेशन के केंद्रीय विषय "भारतीय साहित्य में आस्था तत्त्वका विषद विवेचन वाराणसी के प्रकांड पंडित प्रो.रामेश्वर मिश्र पंकज ने कर शेष सत्रों में चर्चा का मार्ग प्रशस्त किया चार सत्रों में विषय के विभिन्न पहलुओं पर गंभीर एवं सारगर्भित चिंतन हुआ

अधिवेशन का समापन नवनिर्वाचित अध्यक्ष डॉ. बलवंत जानी के प्रेरक उदबोधन तथा नवनियुक्त संगठन मंत्री श्री श्रीधर पराड़कर के संगठनात्मक दिशानिर्देश के साथ हुआ। इस अवसर पर कच्छी भाषा एकादमी के अध्यक्ष तथा गुजरात सरकार के मंत्री श्री विशेष रूप से उपस्थित थे.
अधिवेशन में प्रतिनिधियों की उपस्थिति उत्साहवर्धक थी - १७ प्रान्तों के ८६ स्थानों से २३० प्रतिनिधि. प्रतिनिधियों की प्रान्तवार उपस्थिति इस प्रकार रही : मध्यप्रदेश ७ स्थानों से १८ प्रतिनिधि, महाराष्ट्र ४ से ११, बिहार ७ से १२, दिल्ली १ से २८, हरियाणा ४ से ११, राजस्थान १३ से २८, उत्तरप्रदेश १४ से २६, उड़ीसा १ से १, उत्तराखंड १ से २, छत्तीसगढ़ ५ से ८, अरुणाचल ३ से ५, असम३ से १७, आँध्रप्रदेश २ से ३, पंजाब १ से १, तमिलनाडु १ से १, १७ से ५६, हिमाचल के २ स्थानों से २ प्रतिनिधि।

मंगलवार, 23 नवंबर 2010

नारी साहित्यकार सम्मलेन

महामहिम राज्यपाल
लोकार्पण
श्रीमती मृदुला सिन्हा
संस्कृति मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा

श्री श्रीधर पराड़कर
श्रीमती क्षमा कौल




























दिनांक २३-२४ अक्टूबर २०११ को भोपाल में आयोजित नारी साहित्यकार सम्मलेन सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। सम्मलेन में १२ प्रान्तों के ३२ स्थानों की ६२ महिला साहित्यकारों की उपस्थिति रही। उदघाटन मध्य प्रदेश के महामहिम राज्यपाल श्री रामेश्वर ठाकुर ने किया। सम्मलेन कि रूपरेखा सह राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्री श्रीधर पराड़कर ने रखी। मुख्य वक्ता थीं प्रसिद्ध उपन्यासकार श्रीमती मृदुला सिन्हा। विशिश्ष्ट अतिथि थे मध्य प्रदेश के संस्कृति मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा।
सम्मलेन के समापन कर्यक्रम की अध्यक्षता संघठन मंत्री श्री सुर्यकृष्ण ने की तथा मुख्य अतिथि थे माखनलाल चतुर्वेदी वि.वि. के कुलपति डॉक्टर कुठियाला।
सम्मलेन में वक्ता थीं क्षमा कॉल जम्मू, नीरजा माधव वाराणसी, वीणा श्रीवास्तव पटना, रीता सिंह कुल्लू, विद्या चिटको नासिक, शेशारात्नाम विशाखापट्नम, अजित गुप्ता उदैपुर, क्रांति बड़ोदरा।
इस अवसर पर सम्मलेन के केंद्रीय विषय पर आलेखों का साहित्य परिक्रमा का विशेषांक भी लोकार्पित किया गया.

सोमवार, 22 नवंबर 2010

राष्ट्रीय अधिवेशन, २०११

अखिल भारतीय साहित्य परिषद् का त्रयोदश राष्ट्रीय अधिवेशन ८-९ जनवरी २०११ को गुजरात प्रान्त के भुज नगर में सम्पन्न होगा। परिषद् से सम्बन्धित सभी साहित्यकार, साहित्य प्रेमी, मनीषी, सादर आमंत्रित हैं। ८ जनवरी को प्रातः ११ बजे उदघाटन होगा तथा ९ जनवरी को ३ बाते समापन होगा। अधिक जानकारी के लिए श्री अम्बादान रोहडिया, ४ हरी नगर, विश्वविध्यालय मार्ग, राजकोट-३६०००५ गुजरात। चलभाष 09426530005

बुधवार, 25 अगस्त 2010

अखिल भारतीय साहित्य परिषद् दिनांक २३-२४ अक्टूबर २०१० को भोपाल मध्य प्रदेश में नारी साहित्यकार सम्मलेन करने जा रही है। सभी भारतीय भाषाओँ तथा साहित्य कि सभी विधाओं कि महिला साहित्यकार इस सम्मलेन में प्रतिभागी के रूप में सम्मिलित होने के लिए आमंत्रित हैं।
संपर्क सूत्र : श्रीधर पराड़कर, राष्ट्रोत्थान भवन, माधव महाविध्यालय के सामने, नई सड़क, ग्वालियर, मध्य प्रदेश,
दूरभाष : ०९४२५४०७४७१,
अखिल भारतीय साहित्य परिषद् दिनांक २-३ अक्टूबर २०१० को ग्वालियर [मध्य प्रदेश] में बाल साहित्य पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन करने जा रही है। प्रतिभागियों को निम्नलिखित विषयों में से किसी एक पर आलेख भेजना आवश्यक है -
१- वर्तमान बाल साहित्य कि ग्राह्यता, २-बाल साहित्य के अनिवार्य तत्त्व, ३-आधुनिक संसाधनों उदाहरनार्थ टीवी, विडियो आदि से ताल-मेल, ३-बाल साहित्य की प्रस्तुति में नवीनता, ४-प्राचीन बाल साहित्य की प्रासंगिकता।
विशेष : बाल पत्रिकाओं के संपादक विशेष रूप से आमंत्रित है।
संपर्क सूत्र : श्रीधर पराड़कर, राष्ट्रोत्थान भवन, माधव महाविद्यालय के सामने, नई सड़क ग्वालियर, मध्य प्रदेश।
दूरभाष : 09425407471